Amber­nath Municipal Politics: BJP-Congress-Shiv Sena ने बदला खेल

सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक
सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक

महाराष्ट्र में जब भी नगर निकाय चुनाव की चर्चा होती है, कैमरे अपने-आप मुंबई की तरफ घूम जाते हैं। BMC का बजट, उसका रुतबा और उसकी राजनीति — सब कुछ “सबसे बड़ा” होता है।
लेकिन इस बार कहानी ने अचानक मोड़ लिया है। अंबरनाथ नगर परिषद ने वो कर दिखाया, जो आमतौर पर राज्य की राजनीति में ही देखने को मिलता है — हर 48 घंटे में नया सत्ता समीकरण।

अंबरनाथ ने साफ कर दिया है कि छोटे शहर अब छोटे खेल नहीं खेलते।

BJP + Congress: जब विरोधी एक ही मेज़ पर बैठ जाएं

मंगलवार को अंबरनाथ में जो हुआ, उसने सियासी पर्यवेक्षकों की भौंहें उठा दीं। BJP, जो राष्ट्रीय स्तर पर Congress-mukt Bharat का नारा देती है, उसी BJP ने अपनी ही सहयोगी Shiv Sena (Eknath Shinde group) को सत्ता से दूर रखने के लिए Congress का हाथ थाम लिया।

Politics में इसे कहते हैं — “No permanent friends, no permanent enemies… only permanent majority.”

इस गठबंधन में Ajit Pawar की NCP ने भी अहम भूमिका निभाई। दिलचस्प बात ये है कि राज्य सरकार में जो पार्टियां साथ हैं, नगर परिषद में वही एक-दूसरे के सामने खड़ी दिखीं।

हाईकमान अलर्ट मोड में: दिल्ली-मुंबई तक हलचल

इस अप्रत्याशित गठबंधन का असर तुरंत दिखा। Congress ने अंबरनाथ इकाई भंग कर दी। 12 नेताओं को सस्पेंड किया गया। Deputy CM Devendra Fadnavis ने BJP को साफ संदेश दिया “Congress के साथ जाना पार्टी लाइन के खिलाफ है”।  उधर Uddhav Thackeray और Sanjay Raut ने मौका नहीं छोड़ा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा —

“Congress-mukt Bharat का नारा शायद सिर्फ़ पोस्टर के लिए है, नगर परिषद के लिए नहीं।”

फिर पलटा खेल: शुक्रवार को स्क्रिप्ट बदल गई

अगर आपको लगा कि कहानी यहीं खत्म हो गई, तो आप महाराष्ट्र की राजनीति को कम आंक रहे हैं। शुक्रवार को Ajit Pawar गुट के 4 पार्षदों ने अचानक BJP-led गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया और सीधे Shinde Sena के पाले में चले गए। उधर Congress से निलंबित किए गए 12 पार्षद BJP में शामिल हो गए।

Shinde Sena के पास पहले से 27 पार्षद थे। NCP पार्षदों और एक निर्दलीय के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पार हो गया। सत्ता वापस वहीं पहुंच गई, जहां से उसे हटाया गया था — बस रास्ता थोड़ा घुमावदार था।

NCP पार्षद क्यों पलटे? वजह ideology नहीं, comfort थी

NCP पार्षदों की दलील सीधी थी Congress के साथ सत्ता साझा करना local level पर सहज नहीं। जनता का mandate महायुति के लिए था। Ground politics में Congress के साथ जाना risk भरा था। यानि मुद्दा ये नहीं था कि जनता ने क्या कहा, मुद्दा ये था कि किसके साथ बैठना ज़्यादा comfortable है।

अंबरनाथ नगर परिषद या सियासी OTT सीरीज़?

अंबरनाथ की राजनीति अब किसी Political thriller जैसी हो गई है:

  1. Episode 1: दोस्त दुश्मन
  2. Episode 2: दुश्मन दोस्त
  3. Episode 3: हाईकमान नाराज़
  4. Episode 4: फिर से सत्ता पलट

Ideology इस पूरी सीरीज़ में Guest appearance से ज़्यादा कुछ नहीं लगती।

छोटा शहर, बड़ा संदेश

अंबरनाथ ने महाराष्ट्र को एक साफ संदेश दे दिया है — अब नगर निकाय चुनाव सिर्फ़ सड़क, पानी और नालियों की बात नहीं रहे। ये चुनाव अब state-level power स्ट्रगल, alliance testing ग्राउंड, और 2024 के बाद की राजनीति का ट्रेलर बन चुके हैं।

और सबसे बड़ी बात — इस खेल में स्थिर सिर्फ़ अस्थिरता है।

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